2.2 How to Check Niche Competition

कीवर्ड क्या होता है

जब हम गूगल सर्च इंजन में कुछ सर्च करने के लिए कुछ भी लिखते हैं तो उसको कीवर्ड कहते हैं कि वर्ड दो तरह के होते हैं एक होता है शार्ट टेल कीवर्ड पर एक होता है long-tail कीवर्ड अगर किसी की वर्ड में 1 वर्ड है तो वह सिंगल कीवर्ड है और अगर किसी सर्च में ज्यादा सारे बर्ड्स को मिलाकर कीवर्ड बनाया गया है तो उसे long-tail कीवर्ड कहा जाता है.

सबसे पहले आपने अपने टाइटल को गूगल में सर्च करना है. जैसे बेस्ट क्रिकेट बैट्स इन इंडिया। तो नीचे आपको कुछ रिजल्ट्स दिखाई देंगे। उन में आपने जो जो आर्टिकल्स हैं, उनको देखना है और देखना है कि क्या उनके टाइटल, जो आपने सर्च किया है उसके साथ  मैच कर रहे हैं.  कितना मैच कर रहे हैं. अगर जो आपने कीवर्ड सर्च किया, अगर सेम टू सेम आपका कीवर्ड इन टाइटल में है, तो कंपटीशन हाई है. फिर आपको उस वेबसाइट के अंदर जाना होगा और उन्होंने जो जो किया होगा, उससे ज्यादा करना होगा और अगर आपको रिजल्ट में वह कीवर्ड ना मिले जो आप सर्च कर रहे हैं. तो आपके लिए सही मौका है, आप फिर उस पोजीशन पर आ सकते हैं. क्योंकि गूगल ने सर्च रिजल्ट में आपको रिलेटेड सर्चस दिखाई है. लेकिन उतनी रिलेटेड नहीं दिखाई है. एग्जैक्ट नहीं दिखाई है. तो अगर आप गूगल को एग्जैक्ट कीवर्ड के ऊपर ब्लॉग दे दोगे तो गूगल आप के ब्लॉग को उनसे ऊपर दिखाएगा। क्योंकि आपने एग्जैक्ट कीवर्ड के ऊपर ब्लॉग बनाया है तो इस तरह से आपने सर्च इंजन में चेक कर लेना है कि आपके कीवर्ड का कंपटीशन क्या है.

सर्च रिजल्ट में आपको वीडियो के लिंक दिखाई देंगे। शॉपिंग साइट दिखाई देंगी और QNA (question answer) दिखाई देगा, रिलेटेड searches  दिखाई देंगी, इन सबको आपने इग्नोर कर देना है. उनको आपने, अपना कॉम्पिटिटर नहीं मानना है. आपने सिर्फ यह देखना है क्या सर्च रिजल्ट में आर्टिकल्स हैं और हैं तो उनके साथ आपका क्या कंपटीशन है और अगर आर्टिकल ना भी हो तो भी आप उस टॉपिक के ऊपर आर्टिकल लिख सकते हैं. फिर आपका आर्टिकल वहां पर आ सकता है क्योंकि गूगल जितनी इंपॉर्टेंस वीडियो या किसी जो को देता है उससे कहीं ज्यादा आर्टिकल्स को देता है क्योंकि गूगल एक सर्च इंजन है तो अगर उसके पास exact आर्टिकल होंगे तो वह सबसे ऊपर आपके आर्टिकल्स को दिखाएगा।

कीवर्ड्स दो तरह के होते हैं पहला होता है इनफॉरमेशनल कीवर्ड और दूसरा होता है कमर्शियल कीवर्ड। जिसको हम ट्रांजिशनल कीवर्ड भी कहते हैं. जब कोई यूजर गूगल में सर्च करता है. तो उसका intent क्या होता है. इंटरनेट मतलब उसका मकसद क्या है. कुछ लोग गूगल में सर्च करते हैं सिर्फ इंफॉर्मेशन लेने के लिए. तो वह गूगल में सर्च करेंगे और इंफॉर्मेशन लेकर वापस चले जाएंगे और कुछ लोग होते हैं जो बाइंग मोड में आते हैं. मतलब informational keywords सर्च करते हैं और उनका मकसद होता है इनफार्मेशन लेना , तो कुछ लोगों का इंटरेस्ट होता है इंफॉर्मेशन लेने का और कुछ बन्दों का इंटरेस्ट होता है बाइंग करने का. तो जो बंदा इंफॉर्मेशन लेने के लिए कीवर्ड सर्च इंजन में  लिखता है तो उसको हम इनफॉरमेशनल कीवर्ड कहते हैं और जो कीवर्ड बाइंग करने के लिए लिखे जाते हैं उसको हम कमर्शियल कीवर्ड्स कहते हैं. तो आपको पता चल गया कि कीवर्ड दो टाइप होते हैं. कमर्शियल और इनफॉरमेशनल।

मान लीजिए किसी ने सर्च किया बेस्ट क्रिकेट इन इंडिया। तो गूगल के पास अगर एक आर्टिकल हो और एक ऐमेजोनिया फ्लिपकार्ट का लिंक हो तो गूगल आर्टिकल के लिंक को ज्यादा इंपोर्टेंस देता है. मतलब आर्टिकल के लिंक को ऊपर रखता है तो इससे क्या पता चलता है कि अगर गूगल में सबसे ऊपर अमेजॉन फ्लिपकार्ट या शॉपिंग साइट के लिंक आ रहे हैं तो आपके लिए वहां पर पोजीशन मिल सकती है तो अगर आप उस की वर्ड पर आर्टिकल लिखेंगे तो आपका आर्टिकल शॉपिंग sites के links से से ऊपर आ सकता है.

गूगल सर्च इंजन में आर्टिकल रैंकिंग में गूगल पोजीशन किस तरह से डिसाइड होती है उसके बारे में जानते हैं.

देखिए अगर सबसे ऊपर कोई फीचर snipet आ  रही है और फीचर snipet  के नीचे किसी वेबसाइट का लिंक है. तो उस पोजीशन को जीरो पोजीशन कहते हैं. वह फर्स्ट पोजीशन नहीं है और उसके बाद अगर कोई ऐड जा रही हैं तो उनको भी फर्स्ट पोजीशन नहीं कहते हैं. वह भी जीरो पोजीशन होती हैं और उसके बाद जैसे जस्ट डायल का लिंक आ गया तो उनको भी हम जीरो पोजीशन कहते हैं क्योंकि यह लोकल SEO की वजह से आती हैं और उसके बाद अगर वेबसाइट का कोई आर्टिकल आ जाता है  तो उसको हम फर्स्ट पोजीशन कहते हैं तो आपने फर्स्ट पोजीशन की तरफ ध्यान देना है, अपने फर्स्ट पोजीशन पर आना है. ना कि जीरो पर. जीरो पर आने के लिए SEO की जरूरत नहीं होती है, पैसे लगते हैं. लेकिन फर्स्ट पोजीशन पर आने के लिए हमें अपनी वेबसाइट में SEO करनी पड़ती है और वही सबसे सही होती है जिसमें पैसे नहीं लगते SEO करनी पड़ती है.

अब हम बात करने वाले हैं एक ऐसे टूल के बारे में जो के फ्री है और जिसकी मदद से आप किसी भी वेबसाइट को easly  analyse  कर सकते हैं।

और उसका नाम है SimilarWeb – Traffic Rank & Website Analysis. Chrome extetion

इस extention की मदद से आप किसी भी वेबसाइट में जो जो चेक कर सकते हो मैं उसके बारे में बताता हूं. इस एक्सटेंशन की मदद से आप उस वेबसाइट की ग्लोबल रैंकिंग चेक कर सकते हो. कि पूरी दुनिया में इसका कितना रैंक आता है. यह रैंक जितना ज्यादा दिखाई देगा। उतना आपके लिए अच्छा है. अगर यह रैंक कम होगा जैसे मान लीजिए यहां पर हंड्रेड आ जाता है तो यह है पूरी दुनिया में 100 नंबर पर चल रहा है तो आपको इसको बीट करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। उसके बाद कंट्री रैंक आ जाएगा।

अलग अलग कंट्री के हिसाब से आप रैंकिंग चेक कर सकते हैं और कैटेगरी रrank , इस कैटेगरी के अंदर इसका क्या रैंक है और उसके बाद में जब आप नीचे स्क्रॉल करेंगे तो आपको इस वेबसाइट का बाउंस रेट पता चल जाएगा, कि इसमें कितना बाउंस रेट है और और इस ब्लॉग के लिए जितना ज्यादा बाउंस रेट  होगा उतना आपके लिए अच्छा है. उस वेबसाइट के लिए सही नहीं है. बाउंस रेट कम होना चाहिए वेबसाइट का, तभी वेबसाइट की परफॉर्मेंस अच्छी होती है. मतलब ज्यादा देर विजिटर वहां पर रुक रहा है.

उसके बाद में पेज पर विजिट जो बंदा एक बार विजिट करेगा वह कितने पेज पढ़ रहा है उसके बाद में मंथली विजेट्स मतलब एक मंथ के अंदर कितने विजेट्स हो जाते हैं कितने लोग यहां पर आ जाते हैं. एवरेज विजिट duration का मतलब होगा कि एक बंदा आया और वह कितनी देर रुका। उसके बाद में अलग अलग कंट्री के हिसाब से आपको ट्रैफिक का पता चलेगा कि कौन सी कंट्री से कितना ट्रैफिक आ रहा है और उसके बाद में आपको ट्रैफिक sourse का पता चलेगा कि कहा से कितने पर्सेंट आ रहा है।  

सोशल मीडिया से कितना आ रहा है,  इन सब चीजों का आपको इससे पता चल जाएगा जो कि आपके लिए बहुत हेल्प करेगा। इसमें परफॉर्मेंस अच्छी दिखाई दे, तो आप उसको अपना ब्लॉग लिखने के लिए follow कर सकते हैं और अगर जो  रिजल्ट आ रहे हैं और उसके performance अच्छी नहीं है तो आपके लिए सही है ,आप अच्छे से लिख कर उससे आगे जा सकते हो. अगर आपके कॉम्पिटिटर की अच्छी रैंकिंग आ रही है तो आपके लिए बीट करना मुश्किल होगा आप उस keyword  को छोड़ सकते हैं।

तो अभी हमने यहां पर क्या सीखा कि अगर आपको लगता है कि आप जिस कीवर्ड पर ब्लॉग लिखना चाहते हो और उस की वर्ड के ऊपर जो ब्लॉक ऑलरेडी रैंक कर रहे हैं और उन ब्लॉग्स की परफॉर्मेंस बहुत अच्छी है तो आपके लिए कंपटीशन बहुत हाई रहेगा तो आप उस कीवर्ड पर ब्लॉग ना लिखें।

अगर आप उससे भी अच्छा लिख सकते हो तो लिखें, अदर वाइज उस कीवर्ड  के ऊपर ब्लॉग ना लिखें।  मान लीजिए आप कीवर्ड  चुन लेते हैं और उस की वर्ड के ऊपर जो वेबसाइट रैंक कर रही हैं उनका बाउंस रेट बहुत ज्यादा है ,मंथली सरचीज बहुत कम है और रैंकिंग भी इतनी अच्छी नहीं है तो आप उस कीवर्ड पर अपना ब्लॉग लिखोगे तो आप रैंक कर सकते हो. तो इस तरह से आपने वेबसाइट के अंदर जाकर उसको एनालाइज करना है और जिस वेबसाइट को बीट करना चाहते हो, जैसे मान लीजिए कोई वेबसाइट रैंक कर रही है तो आपने यह देखना है कि उस वेबसाइट के अंदर क्या है, तो आपने सभी चीजें उससे बेहतर करनी है, जैसे उसने इमेज नहीं डाली तो आपने इमेज डालनी है, अगर उसने हेडिंग नहीं बनाए तो आपने हेडिंग बनाने हैं, टेबल नहीं बनाया तो आपने टेबल बनाना है, तो आपको उससे एक कदम आगे चलना पड़ेगा, फिर आप उसकी पोजीशन पर आ पाओगे।

किसी भी वेबसाइट को और अच्छे से एनालाइज कैसे किया जा सकता है

किसी भी वेबसाइट को और अच्छे से एनालाइज करने के लिए आप पेड टूल का यूज़ करिए क्योंकि यह जो chrome-extension होती हैं यह एग्जैक्ट डाटा नहीं देती हैं क्योंकि यह फ्री हैं और इसके लिए आप AHREF का यूज़ करिए क्योंकि वह एक पेड टूल है और वह ऑलमोस्ट एग्जैक्ट डाटा बताता है उसमें आपको वेबसाइट के स्टैटिक्स और अच्छे से पता चल जाएंगे। बैकलिंक्स के बारे में पता चल जाएगा और सभी चीजों के बारे में काफी नॉलेज आ जाएगी ताकि आप उस कीवर्ड  को सिलेक्ट कर सको।

देखिए यह जरूरी नहीं है कि आप गूगल में फर्स्ट पोजीशन या जीरो पोजीशन पर ही रैंक करें। आप पहले पेज पर कहीं पर भी रैंक कर गए तो आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक आएगा तो उसके लिए मान लीजिए आप 3rd  पोजिशन के आर्टिकल को एनालाइज करते हो और उस आर्टिकल के अंदर ट्रैफिक ज्यादा नहीं है या कुछ ऐसी कमियां हैं जिनको आप पूरी कर सकते हो. तो आपके लिए थर्ड पोजिशन भी सही रहेगी आप उसे बेहतर लिखिए और आप उस पोजीशन पर आ सकते हैं तो आप किसी भी एक वेबसाइट को चुन सकते हैं उसको बीट करने के लिए या आप ज्यादा वेबसाइट को भी चुन सकते हैं कि आप सबको बीट कर सकते हो वह आप पर डिपेंड करता है तो यह ना सोचें कि मैंने सिर्फ फर्स्ट पोजीशन पर ही रैंक करना है देखिए फर्स्ट पोजीशन तो no डाउट अच्छी ही होगी। उसमें कोई कमी नहीं होगी और उसको बीट आसानी से नहीं की या जा सकता। जितने भी कीवर्ड होते हैं उस पर कोई ना कोई तो रैंक करता ही है लेकिन कई बार उसमें भी कमी होती है. तो उसको analyse kareye , उस कमी को दूर करिए और जितना उसने किया है उतना तो करना ही है ,तो उससे आप उस वेबसाइट को बीट कर सकते हैं।

बेस्ट क्रिकेट बैट्स एक कमर्शियल इंटेंट कीवर्ड होता है क्योंकि इस कीवर्ड को कोई सर्च करता है तो बैट खरीदने के लिए ही करता है.

अब हम जानते हैं इनफॉरमेशनल इंटेंट कीवर्ड के बारे में, इनफॉरमेशनल इंटेंट कीवर्ड बेसिकली how to से स्टार्ट होते हैं तो उससे हमें पता चल जाता है कि यूजर कुछ सीखने के लिए आया है. इंफॉर्मेशन लेने के लिए आए हैं तो इसलिए हम इसको इंफॉर्मेशनल  इंटेंट कीवर्ड कहते हैं।

जिस की वर्ड को या जिस long-tail कीवर्ड को आप सर्च करते हैं तो उसको सर्च करने से जो रिजल्ट आते हैं, उन रिजल्ट्स में आपने यह जरूर चेक करना है कि जो रिजल्ट आए हैं उनके टाइटल में या उनके आर्टिकल में, आपने जो सर्च किया है वह सेम है या थोड़ा अलग है, अगर उसमें थोड़ा भी अलग कीवर्ड हो तो आपके लिए एक पोजीशन मिल सकती है, क्योंकि आपने जो कीवर्ड चुना है वह एग्जैक्ट मैच नहीं किया है। अगर बिल्कुल एग्जैक्ट मैच कर रहा है तो आपके लिए कंपटीशन ज्यादा है अदर वाइज आप उस पोजीशन पर आ सकते हो अगर आप उससे अच्छा लिख देते हो तो।

आप जब भी गूगल में long tail कीवर्ड सर्च करेंगे तो आपने इस बात को जरूर चेक करना है कि जो रिजल्ट आ रहे हैं उनके टाइटल आपके कीवर्ड के साथ मैच कर रहे हैं या नहीं।  अगर नीचे सभी रिजल्ट आपके कीवर्ड के साथ मैच कर रहे हैं तो आपने उस कीवर्ड को बिल्कुल भी सिलेक्ट नहीं करना है।  क्योंकि आप उस कीवर्ड को बीट कर  पाओगे।  आपने सिर्फ तब ही कीवर्ड  को सेलेक्ट करना है. अगर रिजल्ट्स में आपके सर्च किए गए कीवर्ड से अलग रिजल्ट आ रहे हो। 

ऐसा क्यों होता है क्योंकि जिस कीवर्ड के ऊपर गूगल के पास रिजल्ट नहीं होते तो वह ओर रिजल्ट दिखा देता है. तब आपके लिए एक पोजीशन बन सकती है.

अगर आपको आर्टिकल लिखने के लिए या सर्च करने के लिए टॉपिक नहीं मिल रहे हैं तो मैंने एक लिस्ट तैयार करी है आप इनमें से टॉपिक सिलेक्ट कर सकते हैं और उनको सर्च कर सकते हैं.

Travel 

  1. City guide: 
  2. Travel tips:
  3. Cultural differences:
  4. Language and travel:
  5. Traveling for work:

Health

  1. Diets:
  2. Nutrition and supplements:
  3. Meditation:
  4. Herbal remedies:
  5. Mindfulness:
  6. Mental health:
  7. Self-care and self-worth:
  8. Confidence boosting:
  9. Skincare:
  10. Traditional medicine:

Fitness and sports 

  • Yoga:
  • Weight loss:
  • Crossfit training:
  • Cycling:
  • Running and marathons:
  • Extreme sports:
  • Hiking:
  • Cheerleading:
  • Pilates:
  • Personal training:

Hobbies 

  1. Gardening:
  2. Drawing:
  3. Art:
  4. Music:
  5. Writing:
  6. Motorcycles:
  7. Technology.
  8. Programming and web development:
  9. Boating and fishing:
  10. Photography:
  11. Fashion:
  12. Makeup:
  13. Golf:
  14. Astronomy and horoscopes:
  15. Horseback riding
  16. Self-defence and martial arts
  17. Interior design
  18. Dancing
  19. Dogs, cats, pets

Food and cooking

  1. Wines and champagne:
  2. Craft beer:
  3. Exotic cuisine:
  4. Cooking:
  5. Home-cooked meals:
  6. Health foods, super foods:
  7. Baking:
  8. Recipes:
  9. Kitchen equipment:
  10. Veganism and plant-based diet:
  11. Coffee or tea:

Entertainment

  • Movies review
  • TV shows:
  • Funny cat videos:
  • Theatre, opera, and ballet:
  • Stand-up comedy and improvisation:
  • Upcoming events:

Gaming

  1. Video game tutorials for beginners:
  2. Game walkthroughs and tips:
  3. Strategy game best practices:
  4. Card and board games:
  5. Outdoor games:

Finance

  1. Financial independence:
  2. Insurances and savings:
  3. Retirement and pension savings:
  4. Managing the family budget:

Relationships

  • Dating guide:
  • Moving together and starting a family:
  • Weddings and marriage:
  • Relationship advice:
  • Divorce:.

Family and home 

  1. Pregnancy and becoming parents:
  2. Parenting and childcare:
  3. Family holidays:
  4. Hobbies for the whole family:
  5. Saving money:
  6. House and garden:
  7. Homeschooling:
  8. Education:
  9. Eco-friendly homes:

Education and career

  1. Career path advice:
  2. Promotions and career coaching:
  3. Learning new skills:
  4. Study hacks:

Social networks 

  1. Instagram celebrities:
  2. Mastering a social network:
  3. Social media detox:
  4. Beginner’s guides:

Politics and society

  1. News and current events:
  2. Political satire:
  3. Society and politics:
  4. Educational blog:

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