5.3 Advance Level Article Writing

आर्टिकल आप किसी भी लैंग्वेज में लिख सकते हो जरूरी नहीं है कि आप इंग्लिश में ही लिखो। शुरू में इंग्लिश ही जरूरी थी लेकिन आज के टाइम में आप किसी भी लैंग्वेज में ब्लॉगिंग कर सकते हो। जब आप गूगल में अपनी लैंग्वेज में कुछ सर्च करते हो तो गूगल आपको ऑटोमेटिकली आपकी लैंग्वेज में रिजल्ट दिखाता है.

जब आप गूगल में सर्च करते हो ow to write a blog तो गूगल आपको जितने भी रिजल्ट दिखाएगा ,सभी इंग्लिश रिजल्ट दिखाएगा क्योंकि आपने इंग्लिश में सर्च किया है , लेकिन जब आप गूगल में सर्च करते हो कि blog kaise likhe तो आपको नीचे के रिजल्ट हिंदी के ही दिखेंगे। इसलिए आप अपनी लैंग्वेज में ब्लॉग लिखो। गूगल ऑटोमेटिकली आपका आर्टिकल लोगों तक पहुंचा देगा। आपको अपनी वेबसाइट में ट्रांसलेटर लगाने की जरूरत नहीं है।

जब कोई गूगल में सर्च करता है तो गूगल को पता चल जाता है कि आप हिंदी में पढ़ना चाहते हो या इंग्लिश में तो गूगल ऑटोमेटिक अली उसी लैंग्वेज के रिजल्ट दिखाता है जिन लैंग्वेज में यूजर पढ़ना चाहता है.

अगर आपको इंग्लिश में लिखना आता है तभी इंग्लिश में लिखो अदर वाइज आप अपनी लैंग्वेज में ब्लॉगिंग करो ,वही सही रहता है।

अगर आप अपनी लैंग्वेज में ब्लॉग लिखोगे तो आपको better रिजल्ट, बैटल result जल्दी मिल सकता है।

जब भी आपने कोई पोस्ट लिखनी है तो सबसे पहले आप उस पोस्ट के लिए कंटेंट इकट्ठा करिए। Optimize बाद में करना है। पहले आप कंटेंट इकट्ठा कर लीजिए और जब कंटेंट इकट्ठा हो जाए तब उसके बाद उसे Optimize करना है।  उसकी SEO करनी है।

देखिए हम पोस्ट क्यों लिखते हैं पोस्ट इसीलिए लिखी जाती है ताकि हमारी पोस्ट गूगल में रैंक कर सके, उस पर ज्यादा से ज्यादा विजिटर आये  और ज्यादा से ज्यादा रुके और हमारे पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा पढ़े तो उसके लिए आप ने सबसे पहले कीवर्ड फाइंड करने हैं जिसके ऊपर मैं ऑलरेडी आपको बता चुका हूं.

किसी भी पोस्ट को लिखने के लिए सबसे इंपोर्टेंट चीज यह होती है कि आप जब भी कोई पोस्ट लिख रहे हो तो आपके पास उस टॉपिक के ऊपर आपके पास कई सारे पोस्ट होने चाहिए।

उसी के बाद ही आपका आर्टिकल रैंक कर पाएगा

एग्जांपल के लिए मैं सिलेक्ट कर लेता हूं चार्जिंग जैक कैसे रिपेयर किया जाता है तो उस से रिलेटेड मेरे पास ओर भी आर्टिकल्स होने चाहिए जिसमें फोकस कीवर्ड सेम होगा, लेकिन आर्टिकल अलग-अलग होंगे। जैसे के चार्जिंग जैक रिपेयर करने के लिए कितने पैसे लगते हैं. क्या हम खुद से  चार्जिंग जैक रिपेयर कर सकते हैं. चार्जिंग जैक मार्केट से चेंज करवाएं या कंपनी से। कम से कम पैसों में चार्जिंग जैक कैसे रिपेयर करें। अगर चार्जिंग जैक हिलाकर लगे तो उसका क्या इलाज है।

जब आपके पास सेम कीवर्ड पर बहुत सारे आर्टिकल्स होंगे और आपने उन पर अच्छे से लिख रखा है. तो आप डेफिनेटली उस कीवर्ड पर गूगल में रैंक कर सकते हो। क्योंकि आपके पास एक ही कीवर्ड के ऊपर बहुत सारे आर्टिकल हैं और गूगल उसी को इंपोर्टेंस देता है जो एक कीवर्ड के ऊपर ज्यादा आर्टिकल लिखता है।

देखिए टाइटल और टॉपिक में बहुत फर्क होता है. टॉपिक एक कीवर्ड  होता है जो कि हम आर्टिकल लिखने के लिए सर्च करते हैं और टाइटल वह होता है जिसमें हम एक से ज्यादा कीवर्ड्स को कंबाइन करके एक टाइटल बनाते हैं। जिसमें प्रॉपर कीवर्ड होते हैं। प्रॉपर करैक्टर होते हैं। तब जाकर एक टाइटल बनता है लेकिन टॉपिक एक कीवर्ड  होता है।  वह शार्ट टेल भी हो सकता है, लोग टेल भी हो सकता है लेकिन वह एक कीवर्ड ही होता है तो इसमें कंफ्यूज नहीं होना। टाइटल और टॉपिक में फर्क होता है तो पहले हमने टॉपिक सेलेक्ट करने हैं। टॉपिक की एक लिस्ट बनानी है। उसके बाद हम जब पोस्ट पब्लिश करेंगे उस टाइम पर उस टॉपिक से एक टाइटल को क्रिएट करके पब्लिश करेंगे।

हमें अपनी वेबसाइट पर सिमिलर टॉपिक के ऊपर कई सारे आर्टिकल लिखने पड़ते हैं तभी हम उस टॉपिक के ऊपर रैंक कर पाते हैं।

जब आप किसी कीवर्ड के ऊपर आर्टिकल लिखते हो तो उसके कुछ टाइम बाद आप जब गूगल में सर्च करते हो तो आपको उस कीवर्ड के ऊपर रिजल्ट नहीं मिलता है जब आप उस कीवर्ड को सर्च करोगे तो आपको नीचे रिजल्ट में आपका आर्टिकल नहीं दिखाई देगा।  जो रिजल्ट दिखाई देंगे उन के टाइटल उस कीवर्ड के साथ सिमिलर भी नहीं होंगे तो आपको समझ नहीं आएगा कि क्या हो रहा है. क्योंकि आपने उस कीवर्ड के ऊपर बिलकुल सिमिलर आर्टिकल लिखा है. फिर भी आप रैंक नहीं कर रहे. जब के जिन्होंने सिमिलर आर्टिकल नहीं लिखा है तो भी वह रैंक कर रहे हैं. उसका कारण यही होता है कि उन्होंने अपनी वेबसाइट में उस कीवर्ड के ऊपर बहुत सारे आर्टिकल लिख रखे होते हैं और आपने उस कीवर्ड के ऊपर सिर्फ एक आर्टिकल ही लिखा है. इसलिए आप उनसे आगे नहीं निकल पाते क्योंकि गूगल की नजर में उनकी अथॉरिटी ज्यादा हो जाती है और आपकी अथॉरिटी कम हो जाती है. उन्होंने गूगल को एक ही टॉपिक के ऊपर बहुत सारा कंटेंट दिया होता है और आपने इतना कंटेंट नहीं दिया होता। इसलिए आप उनसे पीछे रह जाते हो. इसलिए अगर आप चाहते हो कि आपका आर्टिकल भी गूगल में रैंक करें तो आपको एक कीवर्ड के ऊपर सिमिलर आर्टिकल्स और उनके जितने भी वेरिएंट्स बनेंगे उन सभी पर पोस्ट लिखनी पड़ेगी। तभी आप गूगल में रैंक कर पाओगे।

आपके टाइटल के अंदर जितने भी कीवर्ड्स आ रहे हैं उन सभी कीवर्ड्स  को अलग-अलग सर्च करके भी देखना है कि उन अलग-अलग कीवर्ड के ऊपर कौन-कौन सी वेबसाइट रैंक कर रही हैं और उनके कंटेंट को भी कंपेयर करना है क्योंकि आपने जो टाइटल लिया है उसके अंदर बहुत सारे कीवर्ड है तो उस टाइटल के अंदर जितने की वर्ड है उन पर भी आपको सर्च करना पड़ेगा क्योंकि कई बार किसी एक कीवर्ड  के ऊपर कोई ऐसी वेबसाइट रैंक कर रही होती है जो अभी भी आप से आगे है तो आपको अच्छी तरह से एनालाइज करना पड़ेगा कि जितने भी आप कीवर्ड यूज कर रहे हैं उनके ऊपर आपका कंटेंट बेस्ट है या नहीं।

आपने जब आर्टिकल लिखना है तो उसके लिए आप कंटेंट तैयार कर लीजिए। उसके बाद में अपने आर्टिकल के टाइटल को गूगल में सर्च करिए। सर्च रिजल्ट में जो भी वेबसाइट रैंक कर रही हैं उनको एनालाइज करिए और उनके डाटा को अपने डाटा के साथ कंपेयर करिए। उनके बाद वेबसाइट के अंदर जो जो कमी होगी उस कमी को आप ने पूरा करना है फिर चाहे वह वर्ड्स हो, हैडिंग हो, इमेज हो कुछ भी हो वह सब पैरामीटर आपको पूरे करने पड़ेंगे तभी आप उनसे आगे निकल पाओगे

अगर आपको किसी कीवर्ड के ऊपर कंटेंट्स चाहिए तो उसकी वर्ड को गूगल में सर्च करिए जितने भी रिजल्ट आ रहे होंगे उनको खोलते जाइए और वहां से आप इंफॉर्मेशन कलेक्ट करिए और उसी इंफॉर्मेशन को अपनी लैंग्वेज में लिख दीजिए और उनसे बेहतर तरीके से लिखिए जो कमी उनकी वेबसाइट में हो उसको पूरा करिए और डाटा कलेक्ट कर के अपनी लैंग्वेज में उसको लिखिए और पोस्ट कर दीजिए।

आप एक ही टाइटल के अंदर पाइप(|) का यूज करके दो टॉपिक लिख सकते हैं और उनको कंटेंट के अंदर हेडिंग बनाकर अलग-अलग कंटेंट लिख सकते हैं लेकिन दोनों टॉपिक similar होने चाहिए।

कैची टाइटल का क्या मतलब होता है?

कैची टाइटल का मतलब होता है कि कोई बंदा हमारे टाइटल को देखें और उसे कैच कर ले. मतलब पकड़ ले. मतलब उसको ऊपर क्लिक कर दे. और उसे रीड करें।

आर्टिकल में आप जो भी पैराग्राफ लिखोगे उस पैराग्राफ के लिए आपने एक हैडर बनाना है.

सबसे पहले आप कंटेंट में आर्टिकल की इंट्रोडक्शन दो।

आज के बाद में आर्टिकल के बारे में 1-2 मेन पॉइंट्स लिखो।

उसके बाद में आर्टिकल का टेबल बनाओ जिसमें #टैग लगाओ।

टेबल के ऊपर हेडिंग भी लिखना है

पैराग्राफ का साइज बड़ा नहीं रखना है पैराग्राफ छोटे ही रखने हैं और हेडिंग का यूज जरूर करना है

आपने सबसे ऊपर h1 रखना है उसके बाद में H1 के अंदर अगर एक से ज्यादा पैराग्राफ हैं और उनके हेडिंग बनाने है तो वहां पर आप H2 रख सकते हो।

तो हेडिंग कैसे रखे जाते हैं इस यहां पर आपको समझ आ चुका है के सबसे ऊपर H1 रखना है और उसके अंदर अगर आपने हेडिंग रखनी है तो H2 H3 अंदर रखने है वैसे अगर मेन हैडिंग है तो H1 और उसके अंदर H2, H3 H4 रख सकते हैं.

देखिए जब आप कीवर्ड इंप्लीमेंट कर रहे हो, किवर्ड इंप्लीमेंट करते समय आपने उस कीवर्ड के synonyms के बारे में देखना है और देखना है कि उस कीवर्ड  का कौन सा synonym इस समय trend में चल रहा है.

उसके लिए आप एक वेबसाइट का उसे कर सकते हो

https://trends.google.com/trends/?geo=US

 जैसे एक कीवर्ड के कई सारे synonyms होते हैं या सिमिलर कीवर्ड होते हैं तो आपने देखना है कि कौन सा सिमिलर कीवर्ड इस समय trend में है तो आप उस trending कीवर्ड को यूज कर सकते हो तो उसका मतलब सेम निकलता है लेकिन आप अगर ट्रेंडिंग कीवर्ड यूज करोगे तो आपका ब्लॉग जल्दी रैंक कर सकता है।

जो आपका फोकस कीवर्ड है वह आपके कंटेंट के अंदर टोटल कंटेंट words का एक या दो पर्सेंट ही होना चाहिए। मतलब आपने अगर 1000 वर्ड्स का आर्टिकल लिखा है तो उसमें आपका फोकस कीवर्ड 10 या 20 ही होना चाहिए।

ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए कि आप जबरदस्ती कीवर्ड को कंटेंट के अंदर घुसा रहे हो. कीवर्ड बिल्कुल नेचुरल होना चाहिए। अगर एक या दो परसेंट से ज्यादा हो जाता है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन वह अगर जरूरी हो तभी होना चाहिए, अदर वाइज एक या दो परसेंट ही हो तो सही रहता है.

ज्यादा कीवर्ड डेंसिटी नहीं होनी चाहिए कीवर्ड डेंसिटी का मतलब हर जगह पर कीवर्ड नहीं होना चाहिए कि वर्ड लिमिटेड होना चाहिए।

यह जरूरी नहीं है कि आप पूरे फोकस कीवर्ड को ही डालो आप फोकस्की वर्ड को डिवाइड करके भी इंप्लीमेंट कर सकते हो गूगल अपने आप उसको डिटेक्ट कर लेता है.

अगर आपकी वर्ड का यूज़ नेचुरल ही कर रहे हो तो फिर अगर 5% तक भी हो जाए तो भी कोई दिक्कत नहीं है

जैसे आप interview की जगह online conference भी रख सकते हैं क्योंकि इस समय कोविड-19 का समय चल रहा है तो इसलिए ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस का ट्रेंड है तो इस तरह से आप उन सिमिलर कीवर्ड्स का यूज कर सकते हैं जो इस समय चल रहे हैं जो के ज्यादा सर्च किए जाते हैं।

synonyms यूज करने का एक ओर फायदा है कि अगर आप चाहते हो कि फोकस कीवर्ड ज्यादा यूज किया जाए पर अगर आप ज्यादा यूज करते हो तो कीवर्ड डेंसिटी बढ़ जाती है. तो आप जहां पर फोकस कीवर्ड यूज़ करना चाहते हो कुछ जगह पर आप उसके synonyms यूज कर लीजिए इससे फोकस कीवर्ड की डेंसिटी भी कम रहेगी और फोकस कीवर्ड का यूज़ भी हो जाएगा।

किसी भी लाइन को ज्यादा लंबा नहीं लिखना उसको छोटे-छोटे पार्ट्स में डिवाइड करना है तभी कोई यूजर उसको समझ पाएगा और गूगल भी समझ पाएगा।

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